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Bihar's Invaluable Role In Education, Literature, Art And Culture|शिक्षा, साहित्य, कला एवं संस्कृति में बिहार की अमूल्य भूमिका




शिक्षा, साहित्य, कला एवं संस्कृति में बिहार की अमूल्य भूमिका 

बिहार जनसंख्या के हिसाब से तीसरा सबसे बड़ा और क्षेत्रफल की दृष्टि से 12वां सबसे बड़ा राज्य है। 22 मार्च 1912 को बंगाल प्रेसीडेंसी से अलग होकर बिहार एक अलग राज्य के रुप में स्थापित हुआ। 

प्राचीन काल से ही बिहार का ज्ञान, साहित्य, और कला के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। शिक्षा, साहित्य, कला एवं संस्कृति में बिहार का योगदान आज भी भारत की पहचान को सशक्त बनाता है। यह भूमि बुद्ध, महावीर, चाणक्य, और आर्यभट्ट जैसे महान विद्वानों की जन्मस्थली रही है|

शिक्षा के क्षेत्र में बिहार का योगदान

शिक्षा के क्षेत्र में बिहार का इतिहास अत्यंत गौरवशाली है। बिहार शिक्षा के क्षेत्र में विश्व को दिशा देने वाला राज्य रहा है। प्राचीन काल में स्थापित नालंदा विश्वविद्यालय, विक्रमशिला विश्वविद्यालय विश्व में ख्याति प्राप्त है। हजारों की संख्या में देश विदेश के छात्र इन शिक्षा केन्द्रों में अध्ययन के लिए आते थे। नालंदा विश्वविद्यालय को विश्व का पहला आवासीय विश्वविद्यालय माना जाता है।

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चाणक्य, आर्यभट्ट जैसै प्राचीन भारत के महान विद्वानों ने बिहार की भूमि से ही दुनिया को ज्ञान दिया था चाणक्य ने कूटनीति तथा अर्थशास्त्र का ज्ञान दिया वहीं आर्यभट्ट ने बिहार में ही रहकर शून्य, दशमलव प्रणाली, पाई(π) के मान का खोज किया।

आधुनिक भारत में भी बिहार ने शिक्षा के क्षेत्र में पटना विश्वविद्यालय, डा० राजेन्द्र प्रसाद कृषि विश्वविद्यालय, पटना मेडिकल कॉलेज, आयुर्वेदिक कालेज, आजीएम‌एस जैसे संस्थानों के अलावा वर्ष २००५ से २०२५ तक स्थापित क‌ई संस्था जैसे सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार, महात्मा गांधी सेंट्रल यूनिवर्सिटी, पटना एम्स, आई आई एम बोधगया, इण्डियन इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, आर्यभट्ट नालेज यूनिवर्सिटी और अनेक अनुसंधान संस्थान ज्ञान के विकास में योगदान दे रहे हैं।

साहित्य में बिहार का योगदान 

बिहार प्राचीन काल से ही साहित्य की उर्वर भूमि रहा है। बिहार  साहित्यिक इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। बिहार का हिंदी, उर्दू, भोजपुरी, मैथिली, और संस्कृत साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान है। बौद्ध और जैन साहित्य के अनेक महत्वपूर्ण ग्रंथ बिहार में ही रचे गये हैं।

वर्ण रत्नाकार (ज्योतिरीश्वर ठाकुर) मैथिली की महत्वपूर्ण रचना है। यह अपने समय का एक विश्वकोश है जो सामाजिक और भौगौलिक वर्णन प्रस्तुत करता है। महाकवि विद्यापति को मैथिली साहित्य का महानतम कवि माना जाता है। उनके गीतों में मिथिला की संस्कृति, लोकधुन, विवाह और उत्सवों का वर्णन है।

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हिंदी साहित्य में रामधारी सिंह ‘दिनकर’, फणीश्वरनाथ रेणु, नागार्जुन और शिवपूजन सहाय जैसे साहित्यकारों ने राष्ट्रीय स्तर पर बिहार को पहचान दिलाई।
उर्दू साहित्य में भी बिहार का स्थान महत्वपूर्ण है, जहां से क‌ई शायर और लेखक उभरे।

कला के क्षेत्र में बिहार का योगदान

बिहार ऐतिहासिक रूप से कला का केंद्र रहा है। भारतीय कला इतिहास के विकास और विस्तार में बिहार का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मधुबनी चित्रकला बिहार के सबसे प्रसिद्ध लोककलाओं में से एक है। मधुबनी चित्रकला ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ अंतराष्ट्रीय स्तर पर बिहार की सांस्कृतिक पहचान बनाया है।

बिहार के सबसे प्रसिद्ध हस्तकलाओं में से एक है सिक्की घास। सिक्की घास का उपयोग टोकरियां, मुर्तियां, और घरेलू वस्तुएं बनाने में किया जाता है जो बिहार की ग्रामीण कलात्मक प्रतिभाओं को प्रदर्शित करती हैं।

बांस से बनी दैनिक उपयोग की वस्तुएं, मिट्टी से बने खिलौने, दीपक, मुर्तियां और घरेलू वस्तुएं और अन्य हस्तशिल्प ग्रामीण कारीगरों की आजिविका का भी महत्वपूर्ण साधन है।
वर्तमान समय में शिल्प मेले, जीआई टैग, डिजिटल प्लैटफॉर्म और पर्यटन विकास, ये सभी बिहार के हस्तशिल्प और लोककला को पुनर्जीवित करने में मदद कर रहे हैं।

संस्कृति के क्षेत्र में बिहार का योगदान 

बिहार ने भारतीय संस्कृति के  इतिहास में महत्वपूर्ण और स्थायी योगदान दिया है। लोक जीवन बिहार की संस्कृति का मूलभूत आधार है। बिहार की संस्कृति सामाजिक शांति, उच्च विचार और सादगीपूर्ण जीवन शैली से परिपूर्ण है। छठ महापर्व बिहार का सबसे खास और पवित्र त्योहार है, इसके अलावा सामा-चकवा, जितिया, मधुश्रावणी, तीज और फगुवा जैसे त्योहार सामाजिक एकता को मजबूत करते हैं। भिखारी ठाकुर द्वारा रचित “बिदेसिया” बिहार की सांस्कृतिक विरासत का सबसे प्रसिद्ध लोकनाट्य है दूसरी ओर, लोक भावनाओं को सामूहिक रूप से व्यक्त करने वाले प्रमुख लोक नृत्यों में “जट-जतिन,” “झिझिया, और “कठघोड़वा” आदि शामिल हैं।

वर्तमान समय में बिहार अपनी सांस्कृतिक विरासत से युवा पीढ़ी को जोड़ने का प्रयास कर रहा है। न‌ई शिक्षा नीति और सांस्कृतिक परियोजनाओं की सहायता से बिहार की परंपराओं को समकालीन परिवेश में पुनर्जीवित किया जा रहा है।

बिहार अतीत की गौरवशाली परंपरा और वर्तमान की संभावनाओं का संगम है। बिहार की सांस्कृतिक धरोहर राष्ट्रीय गर्व का विषय है। भविष्य में यदि इस विरासत का संरक्षण और संवर्धन किया जाए, तो बिहार पुनः ज्ञान और संस्कृति का वैश्विक केंद्र बन सकता है।


डिस्क्लेमर:- इस लेख का उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी प्रदान करना है।ये लेखक के नीतीश विचार हैं। अधिक जानकारी हेतु विषय विशेषज्ञ से संपर्क करें। टंकण करते समय सावधानी बरती गई है फिर भी यदि लेख/तथ्य में किसी प्रकार की त्रुटि सुधार करने की आवश्यकता हो तो email द्वारा संपर्क करें।


बिहार दिवस क्यों मनाया जाता है?: Why Is Bihar Diwas Celebrated?

 


      बिहार, जनसंख्या के हिसाब से भारत का तिसरा सबसे बड़ा एवं क्षेत्रफल के अनुसार  12वां राज्य है। यह भारत के उत्तर-पूर्वी भाग के मध्य में स्थित एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक राज्य है। बिहार के पावन भुमि पर अनेक संतों का जन्म हुआ, यह वही प्रदेश है, जहां महान गणितज्ञ और खगोलशास्त्री आर्यभट्ट, अशोक, अजातशत्रु  एवं बिम्बिसार जैसे महान राजाओं का जन्म हुआ। देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद एवं सिक्खों के दसवें गुरु गोविंद सिंह का जन्म भी बिहार में ही हुआ।

बिहार दिवस


       बिहार प्राचीन काल से ही ज्ञान एवं शिक्षा का केन्द्र रहा है, प्रसिद्ध विश्वविद्यालय नालंदा विश्वविद्यालय, बिहार में स्थित है। देश के बाहर के छात्र भी यहां अध्ययन एवं अध्यापन कार्य करने आते थे। 


बिहार दिवस मनाने का शुरुआत किसके द्वारा एवं कब से किया गया?:Who started Celebrating Bihar Diwas and when? 

      

          बंगाल प्रेसीडेंसी से अलग कर 22 मार्च 1912 को बिहार को राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ। इसी वजह से प्रत्येक वर्ष 22 मार्च को बिहार दिवस मनाया जाता है। जिसकी  शुरुआत बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी द्वारा वर्ष 2010 से किया गया।

            बिहार दिवस पुरे राज्य में उत्साह के साथ मनाया जाता है जिसका मुख्य उद्देश्य बिहार के इतिहास, संस्कृति और उपलब्धियों को प्रदर्शित करना होता है। वर्ष 2025 में बिहार दिवस की थीम ‘उन्नत बिहार, विकसित बिहार’ रखा गया है। इस थीम के तहत बिहार सरकार द्वारा प्रदर्शनी, सांस्कृतिक कार्यक्रम आदि का आयोजन किया जाएगा , ताकि यहां के लोग अपने बिहार की सांस्कृतिक विरासत को जान सकें।

READ: गठित किये जा चुके संयुक्त संसदीय समिति


डिस्क्लेमर:- इस लेख का उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी प्रदान करना है। 


Joint Parliamentary Committee| संयुक्त संसदीय समिति



            संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) भारतीय संसद द्वारा विशेष मुद्दे, कानून या विवाद, घोटाले आदि की जांच करने के उद्देश्य के लिए गठित एक समिति है। जेपीसी अस्थायी समिति होती है। अस्थायी समितियां अपना कार्य समाप्त करने पर स्वत: समाप्त हो जाती है।

            जेपीसी में लोकसभा एवं राज्यसभा दोनों के सदस्य शामिल होते है। सदस्यों को लोकसभा के अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति द्वारा नामित किया जाता है, और इसमें प्रतिनिधित्व का संतुलन बनाए रखने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्य शामिल होते हैं। लोकसभा के स्पीकर समिति के अध्यक्ष का चुनाव करते हैं।

                जेपीसी के गठन से सरकारी जवाबदेही बढ़ती है, क्योंकि यह महत्वपूर्ण मुद्दों की जांच करती है, खासकर घोटालों, भ्रष्टाचार या नीतिगत खामियों से जुड़े मुद्दों की। जेपीसी को संपूर्ण जांच करने का अधिकार है, जिसमें दस्तावेजों की जांच करना, गवाहों को बुलाना और सबूत इकट्ठा करना शामिल है।

               जांच के बाद, जेपीसी अपनी रिपोर्ट संसद को सौंपती है, जो बाध्यकारी हो भी सकती है और नहीं भी। सरकार के लिए जेपीसी की सिफारिशों का पालन करना अनिवार्य नहीं है। सरकार द्वारा समिति की सिफारिशों को स्वीकार या अस्वीकार किया जा सकता है।

             जब महत्वपूर्ण घोटाले या विवाद होते हैं, तो जेपीसी का गठन अक्सर लोकतांत्रिक संस्थानों में जनता के विश्वास की बहाली में योगदान करती है। यह दर्शाता है कि सरकार और संसद दोनों आम लोगों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर कार्रवाई करने और उनका समाधान करने के लिए तैयार हैं।


गठित किये जा चुके संयुक्त संसदीय समितियां 

बोफोर्स स्कैंडल जेपीसी (1987): 6 अगस्त 1987 को पहली बार जेपीसी का गठन किया गया था । इसकी अध्यक्षता कांग्रेस के राजनेता बी. शंकरानंद ने की थी।बोफोर्स तोपों की खरीद में रिश्वत के आरोपों की जांच की गई।

हर्षद मेहता स्कैम:- दुसरी जेपीसी का गठन बैंकिंग एवं प्रतिभूति लेन देन में विसंगतियों के जांच के लिये अगस्त 1992 में किया गया था।

केतन पारेख शेयर बाजार घोटाला:- तिसरी जेपीसी का गठन अप्रैल 2001 में किया गया था।

पेय पदार्थों एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं में कीटनाशकों के अवशेषों की जांच करना एवं सुरक्षा मानक स्थापित करने के लिये चौथे जेपीसी का गठन अगस्त 2003 में किया गया था।

2-जी स्पेक्ट्रम घोटाला:- 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच के लिये पांचवें जेपीसी का गठन फरवरी 2011 में किया गया था।

वीवीआईपी चॉपर घोटाला:- 2013 में वीवीआईपी चॉपर घोटाला के जांच के लिये जेपीसी का गठन किया गया।

भूमि अधिग्रहण बिल के लिये 2015 में संयुक्त संसदीय समिति का गठन किया गया।

एन आर सी के लिये 2016 में संयुक्त संसदीय समिति का गठन किया गया।

व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक के लिये 2019 में जेपीसी का गठन किया गया।

वक्फ (संशोधन) विधेयक के लिये अगस्त 2024 में जेपीसी का गठन किया गया।

              लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए संयुक्त संसदीय समिति गठन किया जाना आवश्यक है क्योंकि यह शासन में पारदर्शिता सुनिश्चित करती है और कार्यकारी शाखा को जिम्मेदार बनाती है।इसका अस्तित्व सत्ता के किसी भी सरकारी दुरुपयोग के खिलाफ सुरक्षा के रूप में कार्य करता है।

डिस्क्लेमर:- इस लेख का उद्देश्य सामान्य जानकारी प्रदान करना है। अधिक जानकारी के लिये विषय विशेषज्ञ से संपर्क किया जा सकता है।


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                  नाभिकीय तकनीक के उपयोग



नाभीकीय तकनीक के उपयोग |Nuclear Technology

 

नाभिकीय तकनीक का कृषि, उद्योग एवं चिकित्सा में क्या उपयोग है?

दो विधियों नाभिकीय संलयन या विखंडन द्वारा नाभिकीय ऊर्जा प्राप्त किया जा सकता है। नाभिकीय तकनीक (Nuclear Technology) का उपयोग रक्षा और सामरिक, कृषि, स्वास्थ्य, उद्योग आदि के लिये होता है। लेकिन इसके उपयोग में अत्यधिक जोखिम होने के कारण इसके उपयोग को सीमित करती है।

रक्षा और सामरिक कार्यों के लिए नाभिकीय तकनीक का प्रयोग नाभिकीय हथियार बनाने में किया जाता है।

भारत में परमाणु उर्जा उत्पन्न करने की शुरुआत 1954 में Department of atomic energy के स्थापना के साथ हुआ। 1960 के दशक में जहांगीर भाभा के नेतृत्व में तीन चरणीय नाभिकीय ऊर्जा प्रणाली को प्रारुप दिया गया।


नाभिकीय तकनीक का स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रयोग

कृत्रिम समस्थानिक जिन्हें प्रयोगशाला में निर्मित किया जाता है द्वारा बिमारियों का पता लगाने और उपचार करने में मदद मिलती है। इन कृत्रिम समस्थानिको को न्युक्लियर मेडिसिन भी कहा जाता है। बिमारियों का पता लगाने में प्रयुक्त प्रमुख समस्थानिक है- Na-24 जिसका उपयोग रक्त अध्ययन में किया जाता है, I-131 का उपयोग थायराइड ग्रंथि के क्रियाशीलता का पता लगाने में किया जाता है, Ar-74 का प्रयोग ट्युमर का पता लगाने में होता है। इनके अलावा अन्य समस्थानिक भी है जिनका उपयोग बिमारियों का पता लगाने में किया जाता है।बिमारियों के उपचार में कृत्रिम समस्थानिक का प्रयोग विकिरण उत्पन्न कर कोशिकाओं और ऊतकों के वृद्धि को नियंत्रित करने में होता है।


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नाभिकीय तकनीक का कृषि क्षेत्र में उपयोग

             कृत्रिम समस्थानिक से विभिन्न प्रकार के बीज बनायें जाते हैं। इन बीजों की मदद से सुखे से ग्रसित, नमक से ग्रसित तटवर्तीय अर्द्ध शुष्क और शुष्क क्षेत्रों को कृषि क्षेत्र के रुप में परिवर्तित किया जा सकता है। 

             कृत्रिम समस्थानिक का प्रयोग जैसे कि P-32 का प्रयोग उर्वरक के साथ मिलाकर खेतों में देने से मिट्टी की उर्वरता खाद के घुलने की दर, पोषक तत्वों का पौधो के द्वारा अवशोषण की दर, पोषक तत्वों का पौधो में वितरण, पौधो की वृद्धि दर, पौधो पर कीट पतंगों, खरपतवार सुखे इत्यादि का प्रभाव ज्ञात किया जाता है।


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नाभिकीय तकनीक का खाद्य्य पदार्थों के संरक्षण में उपयोग

           कम उर्जा वाले नाभिकीय विकिरण का उपयोग कर खाद्य्य पदार्थों को सुरक्षित रखा जा सकता है। विकिरण का उपयोग करने से खाद्य्य पदार्थों में निम्न प्रक्रियाएं होती है जिसके कारण खाद्य्य पदार्थ सुरक्षित रहता है।

  • रासायनिक बंधन टुट जाते हैं जैविक प्रक्रिया धीमी हो जाती है।
  • जीवाणु, विषाणु, फुफंदी इत्यादि मर जाते हैं।
सावधानी
  • विकिरण नियंत्रित होना चाहिए 
  • विकिरण से सुरक्षा के उपाय होने चाहिए 
  • इसे हरी सब्जियों एवं वर्षा रहित पदार्थ जैसे की मांस, मछली, अंडे इत्यादि के लिए अनुपयुक्त माना गया है।


नाभिकीय तकनीक के औद्योगिक उपयोग

       नाभिकीय विकिरण का उपयोग औद्योगिक संरचना की सुदृढ़ता जांच करने में, रासायनिक अभिक्रिया में उत्प्रेरक के रुप में किया जाता है।

 कार्बन डेटिंग:- यह प्रक्रिया कार्बन के समस्थानिक C-14 के अर्द्ध आयु पर आधारित है। वायुमंडल में C-14 का निर्माण, N-14 से होता है। प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया द्वारा C-12 के साथ C-14 भी पौधो में संश्लेषित हो जाता है। जीवन अवधि के दौरान C-14 और C-12 का अनुपात निश्चित बना रहता है। मृत्यु उपरांत C-14 अपने अर्द्ध आयु के अनुसार अपघटित होकर C-12 में परिवर्तित होता जाता है। इनदोनो अनुपातों की अर्द्ध आयु के सापेक्ष तुलना करने पर जीवाश्म की आयु ज्ञात हो जाती है। इस विधि का उपयोग कर 10 लाख साल वाले जीवाश्मों की आयु ज्ञात की जा सकती है।


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डिस्क्लेमर:- यह कंटेंट केवल सामान्य जानकारी प्रदान करता है। यह लेखक के अपने विचार है। अधिक जानकारी के लिए किसी विषय विशेषज्ञ से संपर्क करें।

Earth Day


 Earth Day: History, Origin, Significance 


Every year on April 22, people celebrate Earth Day. The purpose of the day is to promote environmental awareness and inspire action to safeguard the environment. We are improving the quality of life on Earth by engaging in actions like planting trees and clearing up rubbish.




1970 saw the celebration of the inaugural Earth Day. On April 22, 1970, 20 million people nationwide participated in large-scale protests across the country to support a sustainable and healthy environment. This was the inaugural Earth Day.It was Senator Gaylord Nelson of Wisconsin who organized the inaugural Earth Day. Over 140 nations worldwide observed Earth Day in 1990.


BIHAR EARTH DAY


Bihar's Chief Minister, Shri Nitish Kumar, initiated the idea of Bihar Prithvi Diwas on August 9, 2011, even though April 22 is World Earth Day. August Kranti Diwas is also observed on August 9. 


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WHY EARTH DAY IS IMPORTANT 


There are various reasons why Earth Day is important. It motivates people, groups, and authorities to take proactive measures to safeguard the environment. People are made aware of the value of sustainable behaviors and environmental care. It draws attention to pressing environmental problems like forest loss, pollution, change in the climate, and wildlife protection on a worldwide scale.


Activities on Earth Day

  • Tree Planting :- In order to provide oxygen for human breathing, trees absorb carbon dioxide. planting trees to enhance air quality and counteract forest loss.
  • Educational Programs:- Organizing conferences, talks, and workshops about environmental issues.
  • Clean:-Planning near by area, park, and beach clean-ups.
  • Recycle:- Live a more eco-friendly lifestyle by reducing your use of single-use plastics, prioritizing recycling and material upcycling.
  • Promote the Modification of Policies:-Advocate for laws and policies that seek to preserve the environment and advance sustainable development.

Ever since its inception, Earth Day has had a tremendous impact on environmental legislation and public awareness. Earth Day has grown into an international movement with participation from more than 190 countries and millions of people. Growing environmental organizations devoted to diverse issues and ongoing environmental projects have been spurred by it.


  In order to solve environmental issues, Earth Day highlights the significance of both individual and group efforts. The importance of Earth Day serves as a constant reminder of our duty to save the environment.




26 January 1950

 


 26 January | Republic Day|गणतंत्र दिवस 


26 जनवरी को भारत का संविधान लागू हुआ था। इसलिए प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी को देश में गणतंत्र दिवस (Republic Day) के तौर पर Celebrate किया जाता है। 26 जनवरी 1950 को देश में पहली बार गणतंत्र दिवस celebrate किया गया था। देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद द्वारा दिल्ली के पुराने किले में ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌ध्वज फहराया गया था। वर्तमान में भारत के राष्ट्रपति दिल्ली के राजपथ पर ध्वज फहराते हैं।



26 नवम्बर 1949 को भारतीय संविधान सभा द्वारा संविधान को अपनाया गया था और 26 जनवरी 1950 को इसे देश में लागू किया गया था। प्रत्येक वर्ष 26 नवम्बर को संविधान दिवस और 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता है।

संविधान तैयार करने के लिए 6 दिसम्बर 1946 को संविधान सभा का गठन किया गया था। संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई। संविधान सभा को संबोधित करने वाले प्रथम व्यक्ति जे.बी. कृपलानी थे। संविधान सभा के अध्यक्ष, डॉ राजेन्द्र प्रसाद एवं उपाध्यक्ष हरेंद्र कुमार मुखर्जी जी को चुना गया। 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा द्वारा तिरंगा को राष्ट्रीय ध्वज स्वीकार किया गया।

संविधान को जल्द तैयार करने के लिए 22 समिति बनायी  गयी जिसमें से संविधान लिखने का कार्य प्रारुप समिति को दिया गया जिसके अध्यक्ष डॉ भीमराव अंबेडकर थे। प्रारुप समिति द्वारा 2 वर्ष 11 माह 18 दिन मे भारतीय संविधान को तैयार किया गया। संविधान तैयार होने के बाद संविधान सभा के 284 सदस्यों ने 24 जनवरी 1950 को हस्ताक्षर किया और 26 जनवरी 1950 को इसे देश में लागु किया गया।

गणतंत्र दिवस समारोह अपनी भव्यता के लिए जाना जाता है, गणतंत्र दिवस का मुख्य कार्यक्रम देश की राजधानी नई दिल्ली में होता है। भारत के राष्ट्रपति राष्ट्र को नियंत्रित करने वाले संवैधानिक ढांचे पर जोर देते हुए इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हैं। प्रतिष्ठित राजपथ भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता, सैन्य कौशल और तकनीकी प्रगति का प्रदर्शन करने वाली एक शानदार परेड का गवाह बनता है।


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सैन्य परेड से परे, गणतंत्र दिवस भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने का एक कैनवास है। विभिन्न राज्यों के लोक नृत्य, पारंपरिक संगीत और जीवंत प्रदर्शन उत्सव में रंग और जीवंतता जोड़ते हैं। यह एक ऐसा समय है जब पूरा देश विविधता के बीच अपनी एकता का जश्न मनाने के लिए एक साथ आता है।

गणतंत्र दिवस वह अवसर भी है जब भारत के राष्ट्रपति विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण योगदान देने वाले व्यक्तियों को पद्म भूषण, पद्म विभूषण और भारत रत्न जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान करते हैं।

गणतंत्र दिवस केवल एक राष्ट्रीय अवकाश नहीं है; यह भारत के लचीलेपन, एकता और लोकतांत्रिक सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता की याद दिलाता है। जैसे ही तिरंगा पूरे देश में फहराया जाता है, यह एक विविध और जीवंत लोकतंत्र के सपनों और आकांक्षाओं का प्रतीक है, जो अटूट दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है।

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Worldwide Cultural Festivals

There are many different cultures and traditions in the globe, and each has its own distinct history, set of beliefs, and holidays. 

These are a few well-known global celebrations. 

1. Spain (Festival -La Tomatina):-

  • Every year, just for fun, people throw tomatoes and engage in a tomato fight during the La Tomatina festival in Bunol, a town in Valencia that is located 30 kilometers east of the Mediterranean. From 1945 until now, it has always been held on the last Wednesday of August.

2. Rio de Janeiro Carnival (Brazil):-

  • With two million visitors a day on the streets, Rio de Janeiro's Carnival is regarded as the largest carnival in the world and takes place each year before Lent. Rio hosted its first Carnival celebration in 1723.

3. Hanami (Japan):-

  • Hanami, or "enjoying the fleeting beauty of flowers," is a traditional Japanese custom. When we talk about flowers, we almost invariably mean the blossoms of cherry or, less frequently, plum trees. Cherry blossoms bloom from late March to early May throughout Japan, and in Okinawa, they even bloom during the second week of January.

4. Songkran (Thailand)

  • In April, there is a traditional Thai New Year festival called Songkran. People pour water on each other to commemorate what is also known as the "Water Festival" and to symbolize erasing bad luck and making room for a new beginning. One of the most thrilling and enjoyable events you will ever attend is held in Thailand, Laos, and Myanmar. Cleaning homes, workplaces, schools, and other public areas is how people get ready for the new year. They are joined by distant relatives who have come home for the holiday to spend time with their loved ones.

5. Oktoberfest (Germany):-

  • The Munich Oktoberfest, which began as a royal wedding celebration, has grown to become the biggest beer festival in the world. Not to mention a wide selection of beers—it also has traditional Bavarian music and food. Named after the slang term for the fairs, Theresienwiese, it is referred to locally as d'Wiesn. Held annually since the year 1810, Oktoberfest is a significant aspect of Bavarian culture.

6. Pongal (Tamil Nadu, India):-

  • As the winter solstice draws to a close, Tamil Nadu celebrates Pongal, a harvest celebration. A unique delicacy called Pongal, made with freshly harvested rice, is prepared, and this is the highlight.

7. Mardi Gras:-

  • Throughout southern Louisiana, especially in the city of New Orleans, people celebrate Mardi Gras. The days leading up to Ash Wednesday, or Shrove Tuesday, are devoted to celebrations for around two weeks. Different cities have different festival seasons. For example, in New Orleans, Louisiana, some traditions believe Mardi Gras to last from Twelfth Night until Ash Wednesday. Mardi Gras is how some people refer to the final three days leading up to Ash Wednesday.

8. Hemis Festival (Ladakh):

  • Ladakh hosts the Hemis Festival, a Buddhist festivity that includes vibrant monks dancing while wearing masks. It honors the day of Guru Padmasambhava's birth, who established Tibetan Buddhism.

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How To Handle Constitutional Issues In The Digital Age

With the speed at which technology is developing in the twenty first century, constitutional framework are facing hitherto unheard-of-difficulties. The growing interconnectedness of civilizations has made discussions of constitutional law increasingly focused on concerns pertaining to free speech, privacy and political power in the digital sphere.



Due to widespread use, the lines separating the public and private domains have become less distinct. Considerable personal data is accessed by corporations and governments, which raise privacy rights issues. Examine the most current legal disputes and legislative actions taken to protect people's right to privacy in the digital sphere.

Internet usage has made it possible for people to express themselves globally, but it also makes it harder to maintain the balance between preventing the spread of harmful content and promoting free speech. Consider the approaches used by democracies based on the constitution to balance protecting fundamental rights with the need for internet regulation.

Today's cyberthreats require governments to  boister their digital defenses, often the cost of individual privacy. Evaluate the constitutional  implications of government surveillance programs and the delicate balance that needs to be struck between preserving civil liberties and ensuring national security.

Analyze how social media affects democratic processes. To protect the integrity of democratic systems, examine cases of disinformation, election meddling, and the role that constitutional safeguards play in resolving these issues.

Examine how differences in access to technology give rise to constitutional issues as societies depend more and more on digital platforms for services and communication. Talk about initiatives aimed at bridging the digital divide and guaranteeing fair access to justice in digital era.

Constitutional frameworks need to change as we forge ahead in the digital age to protect fundamental rights and address new issues. Legislators, jurists, and citizens all find it difficult to strike the correct balance between constitutional principles and technological innovation. The future of individual liberties and government in our globalized society will be shaped by the way constitutional law develops in the digital age.

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Mineral and Producing States| प्रमूख खनिज एवं उनके उत्पादक राज्य


भारत में सभी प्रकार के खनिजो की प्राप्ति होती है। धात्विक खनिजों में सोना, चांदी, मैंगनीज, तांबा, सीसा, जस्ता, लोहा, टिन आदि एवं अधात्विक खनिजों में संगमरमर, चुना पत्थर, नमक, हीरा, जिप्सम, अभ्रक आदि खनिज पाये जाते हैं। इनके अलावा युरेनियम, ग्रेफाइट, थोरियम, कोयला, प्राकृतिक गैस आदि भी पाये जाते हैं।

प्रमुख खनिज एवं पाये जाने वाले राज्यों के नाम:-

1. मैंगनीज

  • यह प्रायः काले रंग की होती है एवं अवसादी चट्टानों में पायी जाती है।
  • साइलोमैलिन तथा ब्रोनाइट प्रमुख अयस्क है एवं पाइरुलोसाइट, हालैंडाइट, सीटैपराइट, मैंगेनाइट, रोडोनाइट आदि अयस्कों से भी इसकी प्राप्ति होती है।
  • मध्यप्रदेश, उड़ीसा, एवं महाराष्ट्र प्रमुख उत्पादक राज्य है। इसके अलावा बिहार, गोवा, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, राजस्थान आदि भी उत्पादक राज्य है।
2. लौह अयस्क
  • अवसादी एवं आगेन्य चट्टानों मे लौह अयस्क की प्राप्ति होती है।
  • इसके प्रमुख अयस्क मैग्नेटाइट, हेमेटाइट, लिमोनाइट, सिडेराइट, लैटराइट आदि है।
  • प्राप्ति स्थान:- मैग्नेटाइट अयस्क बिहार, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, हरियाणा आदि राज्यों में पाये जाते हैं। लिमोनाइट अयस्क पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश, जम्मु कश्मीर, गुजरात आदि राज्यों में पाये जाते हैं। बिहार, मध्यप्रदेश, कर्नाटक आदि राज्यों में हेमेटाइट अयस्क पाया जाता है।
3. तांबा
  • तांबा की प्राप्ति आग्नेय, अवसादी, एवं कायांन्तरित चट्टानों से होती है। 
  • प्रमुख अयस्क:- क्युप्राइट, मैकेलाइट, तांबा ग्लांस आदि
  • प्राप्ति स्थान:- बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान आदि
4. अभ्रक
  • यह आगेन्य एवं कायांन्तरित चट्टानों के रुप में पाया जाता है।
  • अभ्रक तीन तरह के होते है- श्वेत अभ्रक या रुबी अभ्रक, पीत अभ्रक या फ्लोगोपाइट, श्याम अभ्रक या बायोटाइट।
  • प्राप्ति स्थान:- बिहार, आंध्रप्रदेश, राजस्थान, केरल, पश्चिम बंगाल, हरियाणा आदि
5. सोना
  • यह आगेन्य एवं कायांन्तरित चट्टानों के रुप में पाया जाता है।
  • प्राप्ति स्थान:- कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु आदि।
6. जिप्सम
  • जिप्सम की प्राप्ति अवसादी चट्टानों से होती है।
  • प्राप्ति स्थान:- राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, जम्मु कश्मीर, महाराष्ट्र, गुजरात आदि

7. जस्ता अयस्क

  • जस्ता अयस्क अवसादी शैलों में पाये जाते हैं। इसका उपयोग लोहे को जंगरोधी बनाने एवं उसकी पालिश के लिये किया जाता है।
  • जस्ता की प्राप्ति बहुत ही कम होती है इसलिए विभिन्न देशों से आयात किया जाता है।



G20 VS G7: Comparative Analysis in Hindi



ग्रुप ऑफ 20 (G20) की स्थापना वर्ष 1999 में वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण एवं वित्तीय, व्यवसाय एवं जलवायु परिवर्तन आदि जैसे मुद्दों पर चर्चा करने के लिये किया गया है।

पुर्व में G20 समुह को G7 समुह कहा जाता था। G7 सात देशो इटली, फ्रांस, जापान, कनाडा, अमेरिका, जर्मनी और ब्रिटेन का समुह था। वर्ष 1998 में एक और देश रुस को भी सदस्य बनाया गया। रुस को सदस्य बनायें जाने के बाद यह आठ देशों का समुह हो गया जिसे G8 समुह कहा गया।

वर्ष 1999 में G8 समुह के आठ देशों के अलावा और अन्य देशों को सदस्य बनाने का फैसला लिया गया। सदस्य देशों की संख्या 19 और युरोपीय संघ होने के कारण इसे G20 समुह कहा जाने लगा।

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G20 समुह मे 19 देश, अर्जेंटीना, आस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इण्डोनेशिया, इटली, जापान, मैक्सिको, रिपब्लिक आप कोरिया, रुस, स‌उदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका और युरोपीय संघ शामिल हैं। सदस्य देशों के अलावा कुछ देशों को अतिथि के रुप में एवं अंतर्राष्ट्रीय संगठनों को भी आमंत्रित किया जाता है।

2023 में अतिथि देश, बंग्लादेश, माॅरिशस, ईजिप्ट, स्पेन, संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, नाइजीरिया, ओमान, सिंगापुर है एवं आमंत्रित अंतर्राष्ट्रीय संगठन- यूएनआईएमएफडब्ल्यूबी,डब्ल्यूएचओ,डब्ल्यूटीओ,आईएलओ,एफएसबी और ओईसीडी हैं।

G20 का पहला सम्मेलन अमेरिका के वाशिंगटन में हुआ था। वर्ष 2023 में 18वां G20 शिखर सम्मेलन का आयोजन भारत में किया जायेगा। इस सम्मेलन के अध्यक्षता करने वाले देश द्वारा इसका आयोजन किया जाता है। 

कार्यशैली

  • जी 20 समुह मे दो कार्य समुह होते है जो नियमित बैठकें करते हैं- 1. वित्त ट्रैक, 2. शेरपा ट्रैक

  • वित्त ट्रैक - वित्त ट्रैक का नेतृत्व सदस्य देशों के वित्त मंत्री और सेंट्रल बैंक के गर्वनर करते है ।
  • शेरपा ट्रैक - शेरपा ट्रैक का नेतृत्व सदस्य देशों के नेताओं के निजी प्रतिनिधि करते हैं। शेरपा जी 20 के मुल कार्य का समन्वय करते हैं।

G20 के प्राथमिक उद्देश्य

  • जी 20 देश आर्थिक एवं वित्तीय नीतियों पर चर्चा और समन्वय करने के लिये हर साल मिलते है। वे मौद्रिक नीति, राजकोषीय नीति, व्यापार और वैश्विक वित्तीय स्थिरता जैसे मुद्दों को संबोधित करते हैं।
  • जी 20 देश जलवायु परिवर्तन, सतत विकास, सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट जैसे विषयों और उनके समाधान पर चर्चा करते हैं।
  • विकासशील देशों में असमानता, गरीबी में कमी एवं विकास
  • व्यापार से संबंधित विवाद पर चर्चा एवं निष्पक्ष व्यापार को बढ़ावा देना
  • जी 20 वैश्विक चिंताओं से सामुहिक रुप से निपटने के लिये बहुपक्षवाद और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है।
  • यह वैश्विक शासन से जुड़ी समस्याओं जैसे व्यापार पर असहमति, विकास के लिये सहायता, भु-राजनीतिक चिंताओं पर चर्चा करने के लिये एक मंच के रुप में कार्य करता है।
G20 के पास निर्णय लेने का अधिकार नहीं है; बल्कि यह चर्चा और नीति समन्वय के लिये एक मंच के रुप में कार्य करता है। महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर सहयोग और चर्चा को बढ़ावा देने के लिए नेता, वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक के गर्वनर सभी इसकी बैठकों में उपस्थित होते हैं।


Chief Ministers Of Bihar From 1952



  • मुख्यमंत्री के पद के अनुसार क्रम नीचे दिया गया है, चुंकि क‌ई मुख्यमंत्री ऐसे है जिनका कार्यकाल एक से अधिक बार रहा है इसलिए मुख्यमंत्री बनने वाले व्यक्ति के अनुसार क्रम में परिवर्तन हो सकता है।

1. श्री कृष्ण सिंह (सिन्हा)

  • प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री (1952)

  • राजनीतिक दल- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
  • अवधि- 1952 (चुंकि प्रथम आम चुनाव 1952 में हुआ था इसलिए अवधि 1952 से) से 31 जनवरी 1961
2. दीप नारायण सिंह
  • कार्यवाहक मुख्यमंत्री
  • राजनीतिक दल- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
  • अवधि- 1 फरवरी 1961 से 17 फरवरी 1961
3. विनोदानंद झा
  • बिहार के तीसरे मुख्यमंत्री 
  • राजनीतिक दल- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
  • 18 फरवरी 1961 से 2 अक्टूबर 1963
4. के बी सहाय
  • बिहार के चौथे मुख्यमंत्री
  • राजनीतिक दल- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
  • अवधि- 2 अक्टूबर 1963 से 5 मार्च 1967
5. महामाया प्रसाद सिन्हा
  • राजनीतिक दल- जन क्रान्ति दल
  • अवधि- 5 मार्च 1967 से 28 से जनवरी 1968

6. सतीश प्रसाद सिंह
  • अन्य पिछड़ा वर्ग से बिहार के पहले मुख्यमंत्री
  • राजनीतिक दल- संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी 
  • अवधि- 28 जनवरी 1968 से 1 फरवरी 1968

7. बी पी (बिन्देश्वरी प्रसाद) मंडल
  • बिहार के सातवें मुख्यमंत्री
  • बिहार विधान परिषद के सदस्य 
  • राजनीतिक दल- संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी
  • अवधि- 1 फरवरी 1968 से 2 मार्च 1968

8. भोला पासवान शास्त्री
  • राजनीतिक दल- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
  • अवधि- मार्च 1968 से जून 1968

जून 1968 से फरवरी 1969 तक राष्ट्रपति शासन

9. हरिहर सिंह या बिहारी जी सिंह
  • राजनीतिक दल- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
  • अवधि- 26 फरवरी 1969 से 22 जून 1969

10. भोला पासवान शास्त्री
  • बिहार के दसवें मुख्यमंत्री 
  • राजनीतिक दल- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
  • अवधि- 22 जून 1969 से 4 जुलाई 1969
6 जुलाई 1969 से 16 फरवरी तक राष्ट्रपति शासन 

11. दारोगा प्रसाद राय
  • बिहार के ग्यारहवें मुख्यमंत्री 
  • राजनीतिक दल- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
  • अवधि- 16 फरवरी 1970 से 22 दिसम्बर 1970

12. कर्पूरी ठाकुर
  • बिहार के बारहवें  मुख्यमंत्री और दुसरे उपमुख्यमंत्री थे।
  • राजनीतिक दल- सोशलिस्ट पार्टी
  • अवधि- 22 दिसंबर 1970 से 2 जून 1971

13. भोला पासवान शास्त्री
  • बिहार के तेरहवें मुख्यमंत्री 
  • राजनीतिक दल- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
  • अवधि- 2 जून 1971 से 9 जनवरी 1972

14. केदार पांडे
  • बिहार के चौदहवें मुख्यमंत्री
  • राजनीतिक दल-भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
  • अवधि- 19 मार्च 1972 से 2 जुलाई 1973

15. अब्दुल गफुर
  • राजनीतिक दल- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
  • अवधि- 2 जुलाई 1973 से 11 अप्रैल 1975

16. जगन्नाथ मिश्रा
  • बिहार के सोलहवें मुख्यमंत्री
  • राजनीतिक दल- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
  • अवधि- 11 अप्रैल 1975 से 30 अप्रैल 1977
30 अप्रैल 1977 से 24 जून 1977 तक रिक्त

17. कर्पूरी ठाकुर
  • बिहार के 17वें मुख्यमंत्री
  • राजनीतिक दल- जनता पार्टी 
  • अवधि- 24 जून 1977 से 21 अप्रैल 1979

18. रामसुंदर दास
  • बिहार के 18वें मुख्यमंत्री
  • राजनीतिक दल- जनता पार्टी
  • अवधि- 21 अप्रैल 1979 से 17 फरवरी 1980
17 फरवरी 1980 से 8 जून 1980 तक राष्ट्रपति शासन

19. जगन्नाथ मिश्रा
  • बिहार के 19वें मुख्यमंत्री
  • राजनीतिक दल- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
  • अवधि- 8 जुन 1980 से 14 अगस्त 1983

20. चन्द्रशेखर सिंह
  • बिहार के 20वें मुख्यमंत्री
  • बिहार विधान परिषद सदस्य 
  • राजनीतिक दल- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
  • अवधि- 14 अगस्त 1983 से 12 मार्च 1985

21. बिन्देश्वरी दुबे
  • राजनीतिक दल- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
  • अवधि- 12 मार्च 1985 से 13 फरवरी 1988

22. भागवत झा आजाद
  • बिहार के 22वें मुख्यमंत्री
  • बिहार विधान परिषद के सदस्य 
  • राजनीतिक दल- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस 
  • अवधि- 14 फरवरी 1988 से 10 मार्च 1989

23. सत्येन्द्र नारायण सिन्हा
  • बिहार के 23वें मुख्यमंत्री
  • बिहार विधान परिषद सदस्य
  • राजनीतिक दल- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
  • अवधि- 11 मार्च 1989 से 6 दिसंबर 1989

24. जगन्नाथ मिश्रा
  • बिहार के 24वें मुख्यमंत्री
  • बिहार विधान सभा के सदस्य
  • राजनीतिक दल- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
  • अवधि- 6 दिसंबर 1989 से 10 मार्च 1990

25. लालू प्रसाद यादव
  • बिहार के 25वें मुख्यमंत्री
  • बिहार विधान परिषद के सदस्य
  • राजनीतिक दल- जनता दल
  • अवधि- 10 मार्च 1990 से 28 मार्च 1995
28 मार्च 1995 से 4 अप्रैल 1995 तक राष्ट्रपति शासन

26. लालू प्रसाद यादव
  • बिहार के 26वें मुख्यमंत्री
  • बिहार विधान सभा के सदस्य
  • राजनीतिक दल- जनता दल
  • अवधि- 4 अप्रैल 1995 से 25 जुलाई 1997

27. राबड़ी देवी
  • बिहार के 27वें मुख्यमंत्री
  • बिहार विधान परिषद सदस्य
  • राजनीतिक दल- राष्ट्रीय जनता दल
  • अवधि- 25 जुलाई 1997 से 11 फरवरी 1999
11 फरवरी 1999 से 9 मार्च 1999 तक राष्ट्रपति शासन 

28. राबड़ी देवी
  • बिहार के 28वें मुख्यमंत्री
  • बिहार विधान परिषद सदस्य
  • राजनीतिक दल- राष्ट्रीय जनता दल
  • अवधि-9 मार्च 1999 से 2 मार्च 2000

29. नीतीश कुमार
  • बिहार के 29वे मुख्यमंत्री
  • बिहार विधान परिषद सदस्य
  • राजनीतिक दल- समता पार्टी
  • अवधि- 3 मार्च 2000 से 10 मार्च 2000

30. राबड़ी देवी
  • बिहार के 30वीं मुख्यमंत्री
  • बिहार विधान परिषद सदस्य
  • राजनीतिक दल- राष्ट्रीय जनता दल
  • अवधि- 11 मार्च 2000 से 6 मार्च 2005
7 मार्च 2005 से 24 नवंबर 2005 तक राष्ट्रपति शासन

31. नीतीश कुमार
  • बिहार के 31वें मुख्यमंत्री
  • बिहार विधान परिषद सदस्य
  • राजनीतिक दल- जनता दल युनाइटेड
  • 24 नवंबर 2005 से 26 नवंबर 2010

32. नीतीश कुमार
  • बिहार के 32वें मुख्यमंत्री
  • बिहार विधान परिषद सदस्य
  • राजनीतिक दल- जनता दल यूनाइटेड
  • अवधि- 26 नवंबर 2010 से 20 म‌ई 2014

33. जीतन राम मांझी
  • बिहार के 33वें मुख्यमंत्री
  • बिहार विधान सभा सदस्य
  • राजनीतिक दल- जनता दल यूनाइटेड
  • अवधि- 20 म‌ई 2014 से 22 फरवरी 2015

34. नीतीश कुमार
  • बिहार के 34वे मुख्यमंत्री
  • बिहार विधान परिषद के सदस्य
  • राजनीतिक दल- जनता दल यूनाइटेड
  • अवधि- 22 फरवरी 2015 से 20 नवंबर 2015

35. नीतीश कुमार
  • बिहार के 35वे मुख्यमंत्री
  • बिहार विधान परिषद के सदस्य
  • राजनीतिक दल- जनता दल यूनाइटेड
  • अवधि- 20 नवंबर 2015 से 26 जुलाई 2017

36. नीतीश कुमार
  • बिहार के 36वे मुख्यमंत्री
  • बिहार विधान परिषद के सदस्य
  • राजनीतिक दल- जनता दल यूनाइटेड
  • अवधि- 26 जुलाई 2017 से 16 नवंबर 2020

37. नीतीश कुमार
  • बिहार के 37वे मुख्यमंत्री
  • बिहार विधान परिषद के सदस्य
  • राजनीतिक दल- जनता दल यूनाइटेड
  • अवधि- 16 नवंबर 2020 से 09 अगस्त 2022

38. नीतीश कुमार
  • बिहार के 38वे मुख्यमंत्री
  • बिहार विधान परिषद के सदस्य
  • राजनीतिक दल- जनता दल यूनाइटेड
  • अवधि-  10 अगस्त 2022 से 28 जनवरी 2024 तक

39. नीतीश कुमार
  • बिहार के 39वे मुख्यमंत्री
  • मुख्यमंत्री के पद पर नौवीं बार शपथ ग्रहण
  • राजनीतिक दल- जनता दल यूनाइटेड
  • अवधि- 28 जनवरी 2024 से 2025

40. नीतीश कुमार
  • राजनीतिक दल- जनता दल यूनाइटेड
  • अवधि- 20 नवम्बर 2025 से अबतक

Disclaimer :- मुख्यमंत्री के पद के अनुसार क्रम  दिया गया है, चुंकि क‌ई मुख्यमंत्री ऐसे है जिनका कार्यकाल एक से अधिक बार रहा है इसलिए मुख्यमंत्री बनने वाले व्यक्ति के अनुसार क्रम में परिवर्तन हो सकता है। अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ या संबंधित विभाग से संपर्क करें।

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