संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) भारतीय संसद द्वारा विशेष मुद्दे, कानून या विवाद, घोटाले आदि की जांच करने के उद्देश्य के लिए गठित एक समिति है। जेपीसी अस्थायी समिति होती है। अस्थायी समितियां अपना कार्य समाप्त करने पर स्वत: समाप्त हो जाती है।
जेपीसी में लोकसभा एवं राज्यसभा दोनों के सदस्य शामिल होते है। सदस्यों को लोकसभा के अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति द्वारा नामित किया जाता है, और इसमें प्रतिनिधित्व का संतुलन बनाए रखने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्य शामिल होते हैं। लोकसभा के स्पीकर समिति के अध्यक्ष का चुनाव करते हैं।
जेपीसी के गठन से सरकारी जवाबदेही बढ़ती है, क्योंकि यह महत्वपूर्ण मुद्दों की जांच करती है, खासकर घोटालों, भ्रष्टाचार या नीतिगत खामियों से जुड़े मुद्दों की। जेपीसी को संपूर्ण जांच करने का अधिकार है, जिसमें दस्तावेजों की जांच करना, गवाहों को बुलाना और सबूत इकट्ठा करना शामिल है।
जांच के बाद, जेपीसी अपनी रिपोर्ट संसद को सौंपती है, जो बाध्यकारी हो भी सकती है और नहीं भी। सरकार के लिए जेपीसी की सिफारिशों का पालन करना अनिवार्य नहीं है। सरकार द्वारा समिति की सिफारिशों को स्वीकार या अस्वीकार किया जा सकता है।
जब महत्वपूर्ण घोटाले या विवाद होते हैं, तो जेपीसी का गठन अक्सर लोकतांत्रिक संस्थानों में जनता के विश्वास की बहाली में योगदान करती है। यह दर्शाता है कि सरकार और संसद दोनों आम लोगों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर कार्रवाई करने और उनका समाधान करने के लिए तैयार हैं।
गठित किये जा चुके संयुक्त संसदीय समितियां
बोफोर्स स्कैंडल जेपीसी (1987): 6 अगस्त 1987 को पहली बार जेपीसी का गठन किया गया था । इसकी अध्यक्षता कांग्रेस के राजनेता बी. शंकरानंद ने की थी।बोफोर्स तोपों की खरीद में रिश्वत के आरोपों की जांच की गई।
हर्षद मेहता स्कैम:- दुसरी जेपीसी का गठन बैंकिंग एवं प्रतिभूति लेन देन में विसंगतियों के जांच के लिये अगस्त 1992 में किया गया था।
केतन पारेख शेयर बाजार घोटाला:- तिसरी जेपीसी का गठन अप्रैल 2001 में किया गया था।
पेय पदार्थों एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं में कीटनाशकों के अवशेषों की जांच करना एवं सुरक्षा मानक स्थापित करने के लिये चौथे जेपीसी का गठन अगस्त 2003 में किया गया था।
2-जी स्पेक्ट्रम घोटाला:- 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच के लिये पांचवें जेपीसी का गठन फरवरी 2011 में किया गया था।
वीवीआईपी चॉपर घोटाला:- 2013 में वीवीआईपी चॉपर घोटाला के जांच के लिये जेपीसी का गठन किया गया।
भूमि अधिग्रहण बिल के लिये 2015 में संयुक्त संसदीय समिति का गठन किया गया।
एन आर सी के लिये 2016 में संयुक्त संसदीय समिति का गठन किया गया।
व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक के लिये 2019 में जेपीसी का गठन किया गया।
वक्फ (संशोधन) विधेयक के लिये अगस्त 2024 में जेपीसी का गठन किया गया।
लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए संयुक्त संसदीय समिति गठन किया जाना आवश्यक है क्योंकि यह शासन में पारदर्शिता सुनिश्चित करती है और कार्यकारी शाखा को जिम्मेदार बनाती है।इसका अस्तित्व सत्ता के किसी भी सरकारी दुरुपयोग के खिलाफ सुरक्षा के रूप में कार्य करता है।
डिस्क्लेमर:- इस लेख का उद्देश्य सामान्य जानकारी प्रदान करना है। अधिक जानकारी के लिये विषय विशेषज्ञ से संपर्क किया जा सकता है।

