रासायनिक प्रदुषण
प्राणियों एवं वनस्पतियों के लिये पर्यावरण का स्वच्छ होना आवश्यक है। पर्यावरण का प्रभाव उस जगह पर पाये जाने वाले प्राणियों एवं वनस्पतियों पर पड़ता है। आज हम अपने विभिन्न क्रियाकलापों से किसी ना किसी तरह पर्यावरण को प्रदुषित कर रहे हैं। आने वाले समय में इसका परिणाम सभी को भुगतना पड़ सकता है।
वायुमंडल में मौजुद अवांछनीय रसायनिक पदार्थों के कारण पर्यावरण प्रदुषित होता है, अधिकांश रसायन मानव निर्मित है जो विभिन्न गतिविधियों के परिणामस्वरूप उत्पन्न होते हैं, जैसे- तेल रिफाइनरी, कोयला आधारित बिजली संयंत्र, खनन, परिवहन, कृषि के लिये उपयोग किये जाने वाले कीटनाशकों आदि से।
वायुमंडल का सबसे निचला क्षेत्र क्षोभमंडल वायु में उपस्थित अवांछनीय ठोस एवं गैस कणो के कारण प्रदुषित होता है।
कारखानों से निकलने वाले सल्फर डाइऑक्साइड गैस अम्ल वर्षा का कारण बनता है। घरों में ईंधन के रुप में उपलों(गोबर से बना हुआ), कोयला, लकड़ी एवं गैस का उपयोग करते हैं जिससे निकलने वाले धुंए से कार्बन मोनोऑक्साइड गैस उत्पादित होता है जो जहरीली गैस होती है। वाहनों से निकलने वाले धुंए से भी कार्बन मोनोऑक्साइड गैस उत्पादित होता है।
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कृषि के लिये उपयोग में लाये जाने वाले कीटनाशक एवं उर्वरक जल स्रोत में पहुंच कर जल को प्रदुषित करते हैं। उन स्रोतों से जल के उपयोग किये जाने पर जलीय जीव एवं स्थलीय जीवों को नुक़सान होता है।
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कृषि रसायनो एवं औद्योगिक प्रदुषको के अधिक उपयोग के कारण मिट्टी की उर्वरा शक्ति में कमी होती है जिससे उत्पादकता में कमी होती है।
बचाव:-
- अधिक से अधिक वृक्षारोपण किया जाना चाहिए।
- ईंधन के रुप में बायोगैस, सी.एन.जी, धुंआ रहित चुल्हा आदि के प्रयोग को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
- कारखानों में ऐसे मशीनों को लगाया जाना चाहिए जो कम प्रदुषको का निष्कासन करें।
- पेड़ों की ऐसी प्रजातियां जो कम धुंआ देती है जैसे- बबुल के लकड़ी का उपयोग ईंधन के रुप में किया जाना चाहिए।

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